व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाते उठाते एक सामान्य युवक कब लाखों दिलों पर राज करने लगा पता ही नहीं चला. भाजपा और कांग्रेस जैसे स्थापित राजनीतिक दलों को हरा कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुआ. स्वच्छ छवि, कुछ अलग कर गुजरने की जनता से अपील, नतीजा? कांग्रेस शून्य, एवं भाजपा ३ सीटो पर सिमट […]

मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भिंड के अटेर विधानसभा उपचुनाव में प्रचार के दौरान सिंधिया राजघराने पर टिपण्णी कर राजनितिक भूचाल ला दिया, उनके बयान से राजनेता अलग अलग धड़े में नजर आये, भारतीय जनता पार्टी के नेता जो स्व. विजयराजे सिंधिया का सम्मान करते हैं, या फिर वो जो […]

चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था, जिसका कार्य है भारत के जनतंत्र की रक्षा करना एवं यह सुनिश्चित करना की चुनाव निष्पक्ष हों, मगर जब चुनाव की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिंह लगे तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिंह लगना तो नुमायाँ है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन अर्थात ईवीएम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह तो समय समय पर लगते ही […]

नौकरी के लिए साक्षात्कार: उम्मीदवार की डिग्री, उम्मीदवार कितने प्रतिशत अंक ले कर उत्तीर्ण हुआ, फिर बैकग्राउंड चेक, इन सब में अगर पास हो गए तो नौकरी मिलने की आशा है. राजनेता की नियुक्ति में न तो कोई शिक्षा की अनिवार्यता और यदि आपको सजा नहीं हुई है तो चलता है फिर चाहे आप पर […]

प्रजातंत्र में मतदान के पवित्र पर्व के माध्यम से मतदाता स्वयं के लिए प्रतिनिधि का चयन करते हैं, ऐसा प्रतिनिधि जो उनके हितों को सरकार में सुरक्षित रखे. उत्तर प्रदेश के के ६०% से अधिक मतदाताओं ने अपने ४०३ प्रतिनिधियों का चुनाव किया और भारतीय जनता पार्टी के ३१२ प्रत्याक्षी विधानसभा में पहुचाये. मतदाताओं में […]

२ विफल मुख्यमंत्रीयों के पश्चात २००५ में जब मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया तब मध्य प्रदेश में आशा की एक की किरण जागी थी.जनमानस को विकास कीआशा थी, युवाओं को रोजगार आशा थी, परिवारों को सुरक्षा की आशा थी. आशा थी की मध्य प्रदेश का कर्ज कुछ […]

भारत में व्हिप का प्रयोग राजनितिक दल अपने दल के जनप्रतिनिधियों को अनुशासन में रखने के लिए करते हैं. राजनैतिक दल तीन प्रकार की व्हिप जारी कर सकते है पहली तरह की व्हिप  एक लाइन की व्हिप होती है जो सदस्यों पर बाध्य नहीं होती, दूसरी तरह की व्हिप  दो लाइन की व्हिप, जिससे सदस्यों […]

भारतीय राजनीति में नैतिकता का पतन तो १९७० में ही आरम्भ हो गया था फिर भी कुछ नेताओं ने नैतिकता का दामन नहीं छोड़ा, चाहे अटल बिहारी वाजपई का इंदिरा गाँधी को दुर्गा का संबोधन हो, या विमान दुर्घटना होने पर माधव राव सिंधिया का त्यागपत्र.लालकृष्ण अडवाणी ने जैन हवाला मामले में नाम आने पर […]

दो राजनितिक दल जो को भारतीय राजनितिक के धरातल पर आज विराजमान हैं, एक है ऐतिहासिक दल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस और दूसरा भारतीय जनता पार्टी जो की ४० से कम वर्ष पुरानी है, जहाँ कांग्रेस सिमटती जा रही है वहीँ भाजपा बढती जा रही है. देश के काफी लोगों को ६० साल से अधिक भारत […]